बड़ी बहन के साथ रात की चुदाई
पढ़िए राज और उसकी बड़ी बहन रानी की गर्मागर्म कामुक कहानी, जहां घर में अकेलेपन ने उनकी छुपी इच्छाओं को जगाया। भाई-बहन के बीच पहली बार की उत्तेजक मुलाकात, चूसना, चाटना और जोशीले सेक्स के साथ। हिंदी में पूरी इरॉटिक स्टोरी!
एक शाम की बात है जब घर में मेहमान आए थे और मुझे दीदी के कमरे में सोना पड़ा। मैं राज हूँ, 22 साल का, और मेरी बड़ी बहन रानी उस वक्त 21 की थी। वो देखने में इतनी खूबसूरत थी कि उसकी मासूमियत में एक आग छुपी लगती थी। उसके बूब्स फर्म और बड़े थे, साइज 38-26-36 जैसा। डबल बेड पर मैं दोनों बहनों के बीच लेटा। रात में मैं उठा और वापस आकर सोया, लेकिन मेरी नजर रानी पर पड़ी। उसका नाइट गाउन ऊपर से खुल गया था और एक बूब बाहर निकल रहा था। उसकी गोलाई और छोटी सी निप्पल देखकर मैं पागल सा हो गया। चुपचाप लेटा, लेकिन मन नहीं माना। मैंने अपना हाथ अनजाने में उसके बूब पर रख दिया। जब वो नहीं हिली, तो हिम्मत बढ़ी और मैं धीरे-धीरे दबाने लगा। फिर नींद आ गई।
सुबह रानी ने पूछा, “रात को क्या कर रहे थे?” मैंने कहा, “मैं तो उठा ही नहीं।” वो चुप हो गई, लेकिन छोटी बहन मुस्कुराई। उसके बाद रानी मुझसे थोड़ी दूरी बनाने लगी, पर मैं उसे चुपके से नहाते देखता। एक दिन बाथरूम में वो अपने बूब्स को निहार रही थी, उन्हें स्क्वीज़ कर रही थी। मुझे पता चला, वो भी उतनी ही हॉट थी। अचानक उसे शक हुआ, पानी मारा, लेकिन मैं बच गया। बाहर आकर वो हंस दी और मेरे चेस्ट को फ्लिक करते हुए ‘ट्वाक’ की आवाज निकाली। मैं समझ गया, वो खेल रही थी।
फिर एक रात घरवाले शादी में गए, मैं और रानी अकेले। मैं इंटरनेट पर था, पॉर्न देख रहा था। वो आई और डांटी, “ये क्या कर रहे हो?” मैं घबरा गया। वो गुस्से में चली गई। अगले दिन घरवाले लौटे, मेहमान भी, तो मुझे फिर उसके कमरे में शिफ्ट होना पड़ा। रात को मैं उसके बगल लेटा। दोनों सो गईं लगीं, तो मैंने उसकी चादर हटाई, नाइटी की हुक खोली। ब्रा में उसके बूब्स टाइट थे। मैंने हाथ रखा, महसूस किया। फिर ब्रा ऊपर करके बूब बाहर निकाला। निप्पल से खेला, वो हार्ड हो गई। आधे घंटे बाद मैंने चूसना शुरू किया। उससे कुछ खट्टा सा पानी निकला, मजा आया। वो सिसकारी भरकर करवट बदली, मैं हट गया। फिर वो उठी, छोटी को जगाया, कुछ दिखाया। छोटी हंसी, “चल, तेरे बूब्स टाइट तो हो गए।” दोनों सो गईं।
एक रात वो मेरे पीछे खड़ी हो गई, मैं चैट कर रहा था। उसने एक साइट का ऐड्रेस दिया, “खोलकर देखो।” खोली तो न्यूड फोटोज। वो डांटी, लेकिन मैंने रोका, सफाई दी। वो बैठी, समझाने लगी, “ये अच्छा नहीं।” बालों में हाथ फेरा, मुझे सीने से लगाया। “प्रॉमिस करो, ये नहीं करोगे।” मैंने कहा, “इसमें बुरा क्या? मुझे तुम्हारे मम्मे अच्छे लगते हैं।” वो सोची, “अगर मैं दिखा दूं, तो छोड़ दोगे?” मैंने हां कहा। उसने नाइट सूट खोला, ब्रा नहीं थी। उसके दूध जैसे सफेद, चिकने बूब्स देखकर मैं पागल। हाथ रखा, करंट सा दौड़ा। उसकी आंखें बंद, शायद शर्म से। मैंने लेफ्ट वाला दोनों हाथों से पकड़ा, चूसने लगा जैसे रसीला आम। वो सीसकारी, “प्लीज राज… ये ठीक नहीं, मैं तेरी बहन हूं… पाप है… छोड़ो।” लेकिन मैं नहीं रुका, एक को मुंह में, दूसरे को दबाया। उसकी सांसें तेज, रेसिस्टेंस कम। वो हम्म… आह… उफ्फ कर रही थी।
मैंने हाथ उसकी टांगों के बीच डाला, नाइटी ऊपर की। वो हटाने लगी, लेकिन ताकत नहीं। हाथ उसकी चूत से टकराया, वो कांपी। “प्लीज भाई… बस करो… बर्दाश्त नहीं होता।” मैंने उंगली लगाई, फड़फड़ाई। फिर टिप घुसाई, वो गीली थी, रस टपक रहा। गोल-गोल घुमाया, उसने टांगें दबाईं, लंबा सांस लिया, चुप। मैं समझ गया, मजा आ रहा। उंगली निकाली, वो बोली, “बस भाई, खुश हो ना? छोड़ दो, पाप है।” मैंने पूछा, “अच्छा नहीं लगा?” वो, “लगा, लेकिन ठीक नहीं।” मैंने उसे खड़ा किया, नाइटी उतारी। वो नंगी, मैंने बेड पर लिटाया, जीभ से चूत चाटी। वो पागल, गांड उछालने लगी, “आह… मर गई… बस छोड़… हाय… मान उफ्फ ओह।” मैंने जीभ अंदर डाली, वो रुक गई, फिर मजा लेने लगी। उसके हाथ मेरे सिर पर, कांपी, झरना मेरे मुंह में। वो मुस्कुराई, “बिलकुल पागल है।” उठी, मुझे खड़ा किया।
वो बोली, “बस अब खुश हो?” मैंने कहा, “मैं अधूरा हूं।” वो, “नहीं राज, आगे ठीक नहीं।” मैंने जिद की, “तुम एंजॉय कर चुकी, मैं?” वो, “हाथ से कर दूंगी।” लेकिन मैंने ओरल के लिए राजी किया। “तू नहीं मानेगा, बड़ा जिद्दी है।” पैंट खोली, अंडरवियर पर हाथ रखा, “इसे इतना बांधकर क्यों रखा?” उतारा, मेरा 9 इंच का देखकर चौंकी, “माय गॉड! इतना बड़ा… नहीं ले सकती मुंह में।” शरारती अंदाज में, “सारा टाइम इसे लंबा-मोटा करने में लगाते हो?” मैंने इंसिस्ट किया, वो बोली, “धोकर आओ।” मैंने कहा, “धोया है।” वो, “अच्छा, तैयारी कर रखी है।” जीभ से चाटा, चूसने लगी, गोलियां सहलाई। मैं पागल, जल्दी एक्सप्लोड। बोला, “छूटने वाला हूं।” उसने हाथ से हिलाया, मैंने कहा, “मम्मों पर।” उसने रगड़ा, टिट-फक किया। मजा आया, मैंने झड़ दिया, लोशन उसके मुंह और मम्मों पर। वो मली, “खुश हो? तेरा रस बर्बाद नहीं किया।” मैंने लंड दिया, वो बोली, “पिछले जनम में गधा रहा होगा, इतना बड़ा।”
मैंने कहा, “बस चूत से लगा लूं।” वो सकपकाई, “प्रॉमिस तोड़ा।” लेकिन जिद पर मान गई, “सिर्फ टच।” मैंने रगड़ा, क्लिट पर, वो मस्त, आंखें बंद। मौका पाकर जटका, टोपा घुसा। वो “आच… आह” कराह उठी। रोकने लगी, मैंने दो जटके दिए, आधा अंदर। “हाय… मर गई… धीरे… बस छोड़… हाय मान उफ्फ ओह।” मैं रुका, ऊपर लेटा। बोली, “वादा तोड़ा।” मैंने कहा, “बस डाला है।” फिर जोरदार जटका, पूरा अंदर। वो कराही, लेकिन आंखें बंद, “ये गलत है राज… जायज नहीं।” सांसें तेज, खुशबू फैली। मैं हल्का हिला, वो नम आंखें। मैंने पोंछी, अंदर-बाहर किया। वो मिन्नत, “मत करो… पाप है।” मैंने हाथ पकड़े, स्पीड बढ़ाई। दर्द गया, वो “उम्म… आह… उफ्फ… धीरे… हाय… ह्न्न्न” करने लगी। मैं समझा, काबू में। हाथ छोड़े, वो बालों में हाथ फेरा, सीने से लगाया। “आह… आह… ह्न्न्न्न” वो कांपी, ढीली, चूत में झरना। आवाज जैसे पिचकारी। वो शर्मा, आंखें ढकी। मैं हंसा, “मजा आ रहा तो शर्मा क्यों?” वो, “मजा आए तो जायज थोड़े। जaldi करो।” मैंने पिस्टन चलाया, “अंदर मत छोड़ना।” मैंने कहा, “पहली बार, मुंह में?” वो मान गई। छूटने पर मुंह में डाला, वो चूसी, सारा माल निगल लिया। बाथरूम गई, साफ की।
वापस आई, कपड़े उठाए, मैंने रोका, सीने से लगाया, “मजा आया?” वो हां में सिर हिलाया। मैंने खींचा, वो, “नहीं, छोटी उठ जाएगी।” लेकिन खुश थी, “बहुत मस्ती हो गई, सो जाओ।” मैं सोया, लेकिन फिर टेंशन, लंड तैयार। मैं उसके कमरे गया, जगाया, अपने कमरे बुलाया। वो आई, “क्या है?” मैंने कहा, “नींद नहीं आ रही।” वो, “लोरी सुनाऊं?” मैं, “तुम सरंगी छेड़ो।” वो, “रात हो चुकी, सो जाओ।” जिद पर, “हद पार कर रहे हो।” मैं, “जिस जगह पहुंचे, आगे हद कहां?” वो शर्मा, “बहुत गंदे हो।” मैंने नाइटी खोली, कोई रोक नहीं। बूब चूसा, वो, “कोई देख लेगा।” मैंने गिराया, “नहीं देखेगा।” टांगों बीच आया, रगड़ा। वो, “पता नहीं चला तू जवान हो गया।” टांगें कमर पर रखी, खींचा। मैंने जटका, पूरा अंदर। वो कराही, लेकिन नॉर्मल।
फिर मैंने घोड़ी बनाया। वो सवालिया नजर, लेकिन मान गई। डॉगी स्टाइल में फक किया, उंगली वेसलीन लगाकर गांड में। वो तिलमिलाई, लेकिन मैंने रोका, “कुछ नहीं होगा।” लंड गांड पर रखा, वो समझी, हटने लगी। मैंने कहा, “मैक्सिमम मजा।” वो, “पीछे नहीं।” मैंने ओके, लेकिन जोर लगाया, 1/4 अंदर। वो कांपी, रोई, तकिया मुंह में। मैंने पूरा उतारा, दर्द में इकट्ठी। फिर अंदर-बाहर, वो फिंगरिंग करने लगी। स्पीड बढ़ी, मैंने उठाया, गोद में, बूब्स दबाए। ज्वालामुखी फटा, अंदर झड़ा। ऊपर लेटा, महसूस किया। रात में 5 बार किया। 4 बजे वो बोली, “मम्मी जगेंगी।” बाथरूम गई, साफ की। मेरे लंड को पोंछा, किस किया, “ये बदमाश है, आज मेरे साथ वो किया जो पति का हक था… और वो भी जो शायद पति न करे। तुम गंदे हो, मुझे भी बेशर्म बना दिया। पिछले जनम में गधा रहा होगा। लेकिन आज से तुम मुझे पत्नी मानो, अकेले में।” सीने में मुंह छुपा, “बेहनचोद।” हाथ पर वीर्य दिखा, “तेरा प्यार ले जा रही हूं।” किस किया, “अगला मौका जल्दी।” मैं सोचता रहा, थैंक्स किसे कहना।