Jija sali ki shadi wala mahol me

  जीजा साली की शादी वाले माहौल में कामुक चुदाई


शादी के उत्सव में जीजाजी और साली के बीच छिपी हुई चाहत की गर्म कहानी। रात की चोरी-छिपे मुलाकात, कामुक स्पर्श और जोशीली चुदाई का रोमांचक वर्णन। पढ़िए यह हिंदी एडल्ट स्टोरी जो आपकी इच्छाओं को जगाएगी।


मेरा नाम समीर है। मैं ३६ साल का जवान मर्द हूँ। सुंदर लड़की को देखकर मन में एक अजीब सी हलचल होती है। चोदने की इच्छा जाग जाती है। मन करता है उसके नर्म-नर्म गालों को छू लूँ और उसके होंठों को चूस लूँ। अपनी बाहों में भरकर उसकी चूचियों को दबा दूँ और अपना लंड उसकी बुर में डालकर चोद डालूँ। उन दिनों शादियों का मौसम था और शादी का माहौल चारों तरफ़ फैला हुआ था। मेरे तीसरे छोटे साले की शादी थी और हम सब ससुराल में इकट्ठा हुए थे। काफ़ी लोग होने की वजह से हर कमरे में कई लोगों का इंतज़ाम था। मेरी सलेज यानी पहले साले की बीवी का नाम था सरला। गेहुआँ रंग, भरा हुआ बदन, ३४-२६-३४ के आंकड़े जैसा, गदराई जवानी और गज़ब की सुंदर। इच्छा होती कि दबोचकर बस चबा ही डालूँ। इठलाती हुई जब चलती, अपनी साड़ी को सामने हाथ से चूत के पास संभालती हुई, तब मन करता कि बस इसकी गर्म चूत को क्यों न मैं ही पकड़ लूँ और मसलता रहूँ। साड़ी से वो अपनी मस्त और तनी हुई चूचियों को भरसक ढकती रहती लेकिन वो बगल से ब्लाउज के माध्यम से दिखती रहतीं। झुकी हुई निगाहों से देखती और मुस्करा देती। हमारा लौड़ा और खड़ा हो जाता।


शाम के करीब ४ बजे थे और मैं उसकी तरफ़ देखे जा रहा था। तभी खिलखिलाती हुई बोली, “क्यों जीजाजी, क्या चाहिए?” मेरे मुँह से निकल पड़ा, “तुम।” चौंककर बोली, “क्या कहा?” मैंने जवाब दिया, “मेरा मतलब तुम्हारे हाथ की एक कप चाय।” चाय पीकर जैसे-तैसे शाम गुजरी और रात हुई। एक कमरे में ऊपर पलंग पर मर्दों को सोने के लिए कहा गया और ठीक नीचे ज़मीन पर औरतों के लिए गद्दे लगाए गए। किस्मत देखिए, पलंग के जिस किनारे पर मैं था, ठीक उसके नीचे ज़मीन पर सबसे पहले सरला का बिस्तर था। मन में बड़ी गुदगुदी हो रही थी। लंड था कि उठे जा रहा था। मैंने ठान लिया कि बच्चू, आज न चूकना। बस मौका देखकर पहल कर ही देना। फिर सोचा कि एक बार तो टोह लेकर देखूँ। मैंने सरला से पूछा, “सरला, ये मेरा तकिया एकदम किनारे में क्यों रख दिया। पलंग पर बीच में रखती।” वो बोली, “क्यों, आप करवट बहुत ज्यादा लेते हैं?” फिर आहिस्ते से बोली, “प्लीज, आप मेरे ऊपर मत गिर जाना।” दोस्तों, उसका ये बोलने का अंदाज़ ऐसा था कि कोई बेवकूफ़ ही समझ न पाए। फिर क्या था, मैंने चादर तानी, लंड हाथ में लिया, और लेटे हुए सबके सोने का इंतज़ार करने लगा।


आखिर रात कुछ गुजरी और थके हुए सभी लोग एक-एक कर गहरी नींद में सो गए सिवाय मेरे और सरला के, जो कि मैं जानता था। हिम्मत जुटाकर मैं आहिस्ता से ऊपर पलंग के किनारे से उतरकर नीचे ज़मीन पर सरला के बगल में लेट गया। कमरे में पहले से ही अंधेरा था। मैंने पहले उसकी चादर आहिस्ता से थोड़ी सी अपने ऊपर ले ली और अपने बदन को उससे सटाया, मानो कह रहा हूँ कि मैं आ गया। वो चुपचाप रही और मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने अपना हाथ अब धीरे से उसकी कमर पर रखा और उसकी नर्म लेकिन गर्म-गर्म नाइटी पर सरकाते हुए उसकी चूची पर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। मैंने अब उसकी चूची को दबाया। वो शांत रही। और मैं मदहोश होने लगा। लंड खुशी के मारे फड़फड़ाने लगा। लंड को मैंने उसकी गांड से चिपका दिया। और हाथ से दूसरी चूची को दबाने लगा। चाहत बढ़ी और मैंने अपने हाथों से उसकी नाइटी को ऊपर उठाया। अब मेरा हाथ उसके बदन पर था। हाथ को ऊपर लाते हुए और उसके नर्म-नर्म बदन का मज़ा लेते हुए मैंने उसकी नंगी चूचियों को छुआ। गोल और एकदम सख्त। नर्म लेकिन गर्म। निप्पल को दबाया और कसकस कर अब मैं चूचियों को दबा रहा था। होंठों से मैं उसकी गर्दन को चूमने लगा। अब लंड चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। आखिर कब तक सहता। कोई आवाज़ भी नहीं कर सकते थे।


एक हाथ मैंने उसकी गर्दन के नीचे से घुसाकर उसकी तनी हुई चूची पर रखा और दूसरा हाथ मैंने सरकाते हुए उसकी चूत पर रख दिया। चूत पर घने बाल थे लेकिन फिर भी एकदम गीली थी। यानी चुदवाने के लिए तैयार। लंड तो बुर में घुसने के लिए बेताब था ही। मैंने अपनी उंगली उसके बुर के दरार को छूते हुए अंदर घुसा दी। उसने एक आह सी भरी। वो भी चुदवाने को एकदम तैयार थी। उसके कान के पास मुँह ले जाकर मैंने फुसफुसाकर कहा, “मैं बाथरूम जा रहा हूँ, तुम थोड़ी देर बाद धीरे से आ जाना जानeman।” आहिस्ता से उठकर दबे पाँव से मैं बाथरूम के अंदर घुस गया और दरवाज़ा हल्का सा खुला रख इंतज़ार करने लगा। पाँच मिनट बाद सरला आई और जैसे ही अंदर घुसी मैंने दरवाज़ा बंद कर चिटकनी लगा दी। अब क्या था। मानो सहनशीलता का बाँध बस टूट गया। मैंने कसकर उसे अपनी बाहों में भरा और अपने होंठ उसके धड़कते होंठों पर रख ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। क्या होंठ थे। जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ। ऐसा टेस्ट कि बस नशा आ गया। एक हाथ से मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे चूमते हुए और दूसरे हाथ से मैं उसकी चूचियों को नाइटी के ऊपर से ही मसल रहा था। मेरा लंड पजामा के अंदर एकदम खड़ा हुआ परेशान हो रहा था। एक्साइटमेंट होने के बाद कपड़ा बहुत बुरा लगता है। नंगा बदन ही अच्छा लगता है। मैंने तुरंत अपने पजामे का नाड़ा खोल उसे हटाया। अंडरवियर निकाल फेंका। टीशर्ट उतार नंगा हो गया।


उसकी नाइटी के बटन को सामने से खोलना शुरू किया। जल्दी से उसके बदन से नाइटी निकाली, ब्रा के हुक को पीछे से खोला, और चूमते हुए दबाते हुए, कस-कस कर एक-दूसरे को मसलते हुए पहले बेसब्री से उसकी नंगी आज़ाद चूचियों को हाथ में ले लिया। सख्त भी थीं और नर्म भी थीं। गर्म भी थीं और टाइट गोल-गोल भी थीं। क्या कहूँ बस गज़ब की चूचियाँ थीं। दबाओ तो चिटक-चिटक जाएँ। लेकिन बहुत-बहुत मज़ा आए। गहरी गुलाबी रंग की निप्पल्स के चारों तरफ़ ब्राउन रंग का गोलनुमा रोज़। सुगंध जो उसके शरीर से आ रही थी, और भी मदहोश किए जा रही थी। सेक्स का सुगंध बोला नहीं जा सकता। बस एंजॉय किया जा सकता है। वो अब भी पूरी तरह से नंगी नहीं थी। नायलॉन का टाइट अंडरवियर उसकी बुर को छुपाए हुए था। उसे जब हटाया तो सरला काफ़ी शर्मा गई और अपना मुँह मेरी छाती में छुपा लिया। मेरा लंबा और फड़फड़ाता हुआ लंड उसके बदन को चूत के आस-पास छूता जा रहा था। मैंने उसके ठोड़ी को हाथों से उठाया अपनी आँखों की तरफ़। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।



मैंने उसे पलकों के ऊपर चूमा। दीवार के सहारे अपने लंड को उसकी चूत के अगेंस्ट दबाया। उसके होंठों को चूसा और चूसता ही रहा। उसकी नंगी गोल-गोल मुलायम गर्म सख्त सेक्सी चूचियों को खूब दबाया और मसला। आखिर रहा नहीं गया और उसकी चूची को निप्पल सहित अपने मुँह में भर लिया। उसकी दाहिनी चूची मसलते हुए, उसकी लेफ़्ट चूची को मैं टेस्ट लेकर चूस रहा था। उसने भी अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ़ देखकर मुस्कराई, मानो कह रही हो कि हाँ, मुझे भी ये सब चाहिए। मैंने मज़ा लेने के लिए उससे पूछा, “सरला रानी, तुम इतने दिन तक कहाँ छुपी थी? चोद दूँ?” उसने एक हाथ से मेरी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रखा था और दूसरे हाथ से मेरे लंड को अपने मुलायम हाथों से पकड़कर बोली, “जीजाजी, जो भी करना है, जल्दी से कीजिए।” मैंने कहा, “क्या करूँ? बोलो न, जान। तुम तो एकदम मलाई हो मलाई।” उसने झट से जवाब दिया, “खा जाइए न।” “क्या-क्या खाऊँ रानी। तुम बड़ी मस्त चीज़ हो यार।” उसने शरारती बातों का मज़ा लेते हुए कहा, “जीजाजी जल्दी से घुसा दीजिए न।” मैंने और मज़ा लेते हुए उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा, “क्या घुसाऊँ और कहाँ।” बोली, “धत्त, आप बहुत बदमाश हैं। लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है।” वो खुद ही मेरे करीब सरक आई, मानो कह रही हो कि हाँ, मैं तैयार हूँ, जारी रखो।


इन्हीं बातों में हम एक-दूसरे के बदन से लिपट-लिपट कर पता नहीं क्या-क्या कर रहे थे। बस कुछ न कुछ पकड़ा-पकड़ी, मसला-मसली, चूसा-चूसी चल रही थी। आखिर मैंने कहा, “रानी, एक बार कहना पड़ेगा। सिर्फ़ एक बार। प्लीज।” पूछने लगी, “क्या कहूँ जीजू?” मैंने मज़ा लेते हुए कहा, “कहो कि मेरी बुर में लंड डालकर चोद दीजिए न।” उसने शर्माने के अंदाज़ से कहा, “चोदिए न, जीजू। और मत तड़पाइए। मुझे ये सब चाहिए।” मैंने भी देखा कि अब ज्यादा देर करने में रिस्क है। मैंने अपना लंड उसके बुर के दरार पर रगड़ते हुए एक धक्का लगाया। लंड अंदर घुस तो गया लेकिन मज़ा नहीं आया। चुदाई का मज़ा तभी है जब औरत को लिटाकर चोदा जाए। बाथरूम के फ़र्श पर मैंने सरला को लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। टांगों को फैलाकर अपना लंड उसकी बुर पर रखा और घुसाया। उसने भी थोड़ी सी मदद की और अपनी बुर से मेरे लंड को समेट लिया। होंठ चूसते हुए, चूचियों को दबाते हुए मैंने चोदना शुरू किया। वो भी नीचे से गांड उठा-उठाकर चुदवाने लगी। क्या चीज़ बनाई है ऊपर वाले ने ये चुदाई। बहुत-बहुत मज़ा आता है। जिसने चुदाई की है उसे ये पढ़कर महसूस हो रहा होगा कि हम दोनों कितना स्वाद ले रहे होंगे चुदाई का। बीच-बीच में चोदते हुए, उसकी चूची को चूस भी रहा था। चुदाई लंबी रखने के लिए मैंने स्पीड मीडियम ही रखी। चूची चूसते हुए और भी कम। आखिर में लंड ने जब सिग्नल दिया कि अब मैं झड़ने वाला हूँ, तब मैंने कस-कस कर चुदाई की। चोदता रहा, चोदता रहा, स्ट्रोक्स पे स्ट्रोक्स लगाता रहा। और वो उछल-उछल कर चुदवाई जा रही थी। ऐसा आनंद आ रहा था कि मालूम ही नहीं पड़ा कि हम दोनों कब एक साथ झड़ गए। जल्दी से हमने कपड़े पहने और बाहर निकलने के पहले मैंने सरला को कसकर अपनी बाहों में जकड़ा और चूमते हुए कहा, “सलेज साहिबा, वादा करो जब भी मौका मिलेगा तो चुदवाओगी।” “आप बहुत पाजी हैं” कहकर वो दबे पाँव चली गई।

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