पड़ोसन नेहा की कुंवारी चूत की पहली चुदाई
पढ़िए आमिर की सच्ची कहानी जहां पड़ोस की 18 साल की नेहा उसे ललचाती है और घर पर अकेले होने पर अपनी कुंवारी फुद्दी चुदवाती है। गर्म किस्से, ब्लोवजॉब और जोरदार चुदाई की डिटेल्स वाली यह हिंदी सेक्स स्टोरी आपको उत्तेजित कर देगी।
मेरा नाम आमिर है। मैंने आपको पहले भी कुछ कहानियाँ भेजी थीं, जो आप लोगों को काफी पसंद आईं। आज मैं आपको अपनी एक और आपबीती सुनाने जा रहा हूँ, लेकिन इस बार मैं इसे और ज्यादा विस्तार से बताऊंगा, क्योंकि ये मेरी जिंदगी की सबसे हॉट और यादगार घटना थी। हमारे घर के बगल में एक फैमिली रहती थी—एक मध्यमवर्गीय परिवार, जहां सब कुछ सामान्य लगता था। उनके घर में माता-पिता, एक बड़ी बेटी जिसकी शादी हो चुकी थी, और छोटी बेटी नेहा। नेहा करीब 18-19 साल की होगी, लेकिन उसकी बॉडी देखकर लगता था जैसे वो किसी मॉडल की तरह परफेक्ट हो। वो कॉलेज में पढ़ती थी, लेकिन घर पर रहकर ज्यादा समय बिताती थी। वो बिलकुल कुंवारी थी, अनछुई माल, और उसकी आंखों में एक तरह की मासूमियत थी जो मुझे हमेशा आकर्षित करती थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से कुछ बदल गया था। वो मुझे अजीब, कामुक नजरों से देखने लगी थी। जैसे ही मैं टेरेस पर जाता, वो अपने घर की छत पर आ जाती और मुझे घूरती रहती। उसकी नजरें मेरे शरीर पर टिकी रहतीं, जैसे वो मुझे नंगा करके देख रही हो।
एक दिन तो हद हो गई। मैं टेरेस पर खड़ा सिगरेट पी रहा था, शाम का समय था, और वो अपने रूम की खिड़की से मुझे देख रही थी। अचानक उसने अपने कमरे की लाइट ऑन की और खुद को न्यूड करके घूमने लगी। मैं हैरान रह गया। उसका फिगर कमाल का सेक्सी था—38-26-38 का परफेक्ट फिगर, गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े मम्मे जो गुरुत्वाकर्षण को चुनौती दे रहे थे, पतली कमर और चौड़े हिप्स। उसकी गांड इतनी राउंड और टाइट थी कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। वो जानबूझकर अपनी बॉडी को ट्विस्ट कर रही थी, जैसे मुझे ललचा रही हो। मैं समझ गया कि वो मुझसे चुदवाना चाहती है, लेकिन मैंने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। मैंने सोचा, शायद वो बस फ्लर्ट कर रही है, या फिर कोई गलती हो रही है। लेकिन दिल में एक आग लग गई थी। रात को सोते वक्त मैं उसके बारे में सोचकर मुठ मारता रहा, कल्पना करता कि कैसे मैं उसकी कुंवारी चूत को फाड़ूंगा।
फिर वो दिन आया जब सब कुछ बदल गया। मैं घर पर अकेला था—मेरे घरवाले किसी रिश्तेदार के यहां गए थे, और मैंने सोचा आज आराम से टीवी देखूंगा। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मैंने खोला तो नेहा खड़ी थी, एक टाइट टॉप और शॉर्ट स्कर्ट में, जो उसकी जांघों को मुश्किल से ढक रही थी। वो मुस्कुराई और बोली, “आमिर भैया, क्या मैं अंदर आ सकती हूं? मम्मी ने कुछ सामान मांगा है।” मैंने उसे अंदर बुलाया, लेकिन मुझे पता था ये बहाना है। वो अंदर आई और दरवाजा बंद करते ही मुझसे लिपट गई। उसकी सांसें तेज थीं, और वो बोली, “भैया, मैं आपको बहुत पसंद करती हूं। आप भी तो मुझे देखते हो न? मैंने नोटिस किया है।” मैंने खुद को संभाला और कहा, “नेहा, तुम अभी छोटी हो, इन बातों में मत पड़ो। जाओ घर जाओ।” लेकिन वो नहीं मानी। उसने अपनी आंखें नीची कीं और बोली, “मैं अब बच्ची नहीं हूं, देख लो!” और उसने अपनी शर्ट उतार दी। उसकी ब्रा में कैद उसके बड़े मम्मे बाहर आने को बेताब थे। मैंने पूछा, “ये क्या कर रही हो? कोई देख लेगा!” वो बोली, “प्लीज, थोड़ा प्यार करो ना। मेरा बहुत दिल करता है सेक्स करने का। रोज रात को अपनी फुद्दी रगड़-रगड़ कर फारिग होती हूं, लेकिन असली मर्द का स्पर्श चाहिए। आज मुझे सुकून दे दो, भैया।”
मैं भी मर्द हूं, कब तक बर्दाश्त करता? फल खुद झोली में गिर रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो तो जैसे दीवानी हो गई—मेरे लिप्स को जोर-जोर से चूसने लगी, अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर घुमाने लगी। उसका एक हाथ सीधा मेरे ट्राउजर में चला गया, और उसने मेरा लंड पकड़ लिया। वो उसे सहलाने लगी, और बोली, “उफ्फ, कितना बड़ा और मोटा है! मैं तो इसी के सपने देखती हूं।” मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसके मम्मों को जोर से दबाने लगा। उसके निप्पल्स हार्ड हो चुके थे, गुलाबी रंग के, जैसे आम के बीज। उसके मुंह से “स्स्सी… आह्ह…” की आवाज निकली। मैंने उसे सोफे पर लिटाया और उसके मम्मों को चूसने लगा—एक को मुंह में लेकर चूसता, दूसरे को हाथ से मसलता। वो अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी, मेरे कंधों पर अपने नाखून रगड़ रही थी, जैसे मुझे और करीब खींच रही हो। उसकी सांसें तेज हो रही थीं, और वो बड़बड़ाने लगी, “भैया, और जोर से चूसो… मेरे मम्मे तुम्हारे लिए ही हैं!”
फिर मैंने अपना ट्राउजर उतारा। मेरा लंड 7 इंच का, मोटा और सख्त, बाहर आ गया। मैंने पूछा, “सक करोगी मेरा लंड?” वो हंसकर बोली, “क्यों नहीं? मैं तो इसी इंतजार में थी!” और वो मेरे लंड पर झुक गई। उफ्फ, क्या क्लास का चूसना लगा रही थी! पहले तो उसने टॉप पर किस किया, फिर जीभ से चाटा, और फिर मुंह में लेकर चूसने लगी। वो प्रो की तरह थी—लंड को मुंह में अंदर-बाहर करती, साथ ही मेरे टट्टों को थूक लगाकर मसाज कर रही थी। मैंने पूछा, “तुमने ये कहां से सीखा?” वो लंड मुंह से निकालकर बोली, “मैंने बहुत सारी ब्लू फिल्म्स देखी हैं, भैया। मुझे बहुत शौक था चूसने का, आज मौका मिल ही गया।” वो फिर से चूसने लगी, और मैं उसके मम्मों को दबा रहा था। अचानक वो बोली, “आपके चड्डू से बहुत सेक्सी बू आ रही है, उफ्फ, मेरी लस्ट और बढ़ रही है!” और मेरे चड्डू पर किस करने लगी, जैसे वो उसकी पूजा कर रही हो। मैं उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में लंड ठूंस रहा था, और वो गैगिंग करते हुए भी एन्जॉय कर रही थी।
काफी देर तक चूसने के बाद उसने कहा, “अब आप भी चाटो ना मेरी फुद्दी! मैं तो बस इंतजार कर रही हूं।” मैंने कहा, “वाई नॉट, मेरी जान! लेट जाओ।” मैंने उसकी स्कर्ट उतारी और पैंटी नीचे सरकाई। उसकी छोटी-सी चूत हल्के हेयर्स से ढकी थी, लेकिन गुलाबी और गीली। मैंने उसकी दोनों टांगें खोलीं और अपनी जीभ उसकी फुद्दी पर फेरी। वो चिल्लाई, “आह्ह्ह… ओह्ह्ह… यस, यू आर वंडरफुल जानो!” मैं उसके क्लिट को चूसने लगा, जीभ से घुमाता, और वो अपने मम्मों को खुद दबाने लगी, आंखें बंद करके मजे ले रही थी। मैंने दाना चूसते हुए एक फिंगर उसकी गीली चूत में डाली, तो पता लगा कि वो अभी तक कुंवारी है—टाइट और अनटच्ड। मुझे और खुशी हुई; कुंवारी फुद्दी मारने का अलग ही मजा है। मैंने दो फिंगर्स डाले और अंदर-बाहर करने लगा, साथ ही जीभ से चाटता रहा। वो अब पागल हो रही थी, अपनी कमर ऊपर-नीचे कर रही थी, “भैया, और जोर से… मैं छूटने वाली हूं!”
फिर मैंने उसकी टांगें पकड़ीं और अपना लंड उसकी फुद्दी पर रगड़ने लगा। वो और जोश में आ गई, बोली, “प्लीज फक मी! मुझे चोदो!” और उसने खुद मेरे लंड को पकड़कर अपनी फुद्दी के सुराख पर रख दिया। मैंने कहा, “जानो, अब हौसला रखना। थोड़ा दर्द होगा, फिर मजे ही मजे।” उसने कहा, “मैं तैयार हूं, प्लीज मुझे चोदो! मैं तुम्हारी हो गई हूं।” मैंने थूक लगाकर लंड को अंदर धक्का मारा, तो वो 3 इंच तक अंदर घुस गया। उसकी चीख निकल गई, “आआआह्ह… दर्द हो रहा है!” मैंने उसके लिप्स पर हाथ रख दिया और कहा, “हौसला बेबी, बहुत शौक था न चुदवाने का? अब मजे लो!” और एक जोरदार शॉट मारा, तो मेरा लंड उसके हाइमन को फाड़ता हुआ फुल अंदर घुस गया। खून निकल आया, उसकी आंखों से दर्द के मारे आंसू निकल आए। मैं रुक गया, उसे किस किया, उसके मम्मों को सहलाया, और कहा, “मैं आराम-आराम से अंदर-बाहर करूंगा, फिर दर्द कम हो जाएगा।” वो बोली, “अभी प्लीज बाहर निकालो, थोड़ी देर बाद करना।” लेकिन मैंने कहा, “नहीं जानो, अब तो नहीं! बस थोड़ा और बर्दाश्त करो।”
उसने मुझे जोर लगाकर हटाना चाहा, लेकिन मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ, और उसे मजा आने लगा। उसने जद्दोजहद छोड़ दी और अपनी टांगें ढीली करके चुदवाने लगी। अब वो “आह… ओह्ह्ह… और जोर से!” कहने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई, उसके मम्मों को दबाते हुए पेल रहा था। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया—उसकी गांड ऊपर करके, और पीछे से लंड डाला। साथ ही उसके हिप्स पर थप्पड़ मारे, जोर-जोर से। उसकी गांड लाल हो गई, लेकिन वो एन्जॉय कर रही थी। उसने पीछे मुड़कर देखा और बोली, “यू आर फैंटास्टिक! आज से मैं तुम्हारी रखैल हूं। जब बुलाओ, दरवाजे पर आ जाऊंगी चुदवाने। उफ्फ, मेरी फुद्दी को आज मार-मार कर फुद्दा बना दो!” वो खुद अपनी कमर हिला-हिला कर लंड को फुद्दी में ले रही थी, जैसे प्रो रंडी हो। मैंने कहा, “गश्ती, आज से तेरी फुद्दी की खैर नहीं! अब तो रोज तेरी फुद्दी का मजा लूंगा, तेरी गांड भी मारूंगा!” और जोर-जोर से उसे चोदना शुरू कर दिया।
अब वो छूटने वाली थी, जोर-जोर से “आह्ह्ह… उफ्फ़… चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत!” की आवाजें निकाल रही थी, मस्ती से चीखें मार रही थी। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, और अचानक वो झड़ गई—उसका शरीर कांपने लगा, और वो मेरे ऊपर गिर पड़ी। मैं भी अब छूटने वाला था। मैंने लंड बाहर निकाला और सारी मणि उसकी कमर और गांड पर गिरा दी। उसने वो अपनी कमर पर मल दी, जैसे कोई क्रीम हो, और हाथों पर लगी मणि चाटने लगी। बोली, “इसका टेस्ट तो बहुत मजे का है! प्लीज, नेक्स्ट टाइम मेरे मुंह में छूटना, मैं पी लूंगी सारा।”
उस दिन के बाद हमारी चुदाई का सिलसिला चल पड़ा। अगले दिन वो फिर आई, इस बार और तैयार होकर—एक सेक्सी लॉन्जरी में। हमने बेडरूम में घंटों चुदाई की। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चोदा, फिर मिशनरी, फिर उसने मुझे राइड किया। वो मेरे लंड पर उछल-उछल कर चुदवाती, उसके मम्मे ऊपर-नीचे होते। एक बार तो मैंने उसकी गांड भी ट्राई की, लेकिन वो टाइट थी, तो सिर्फ फिंगरिंग की। वो बोली, “अगली बार गांड भी मार लेना, भैया। मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूंगी।” हमने कई दफा ऐसे ही मिलना जारी रखा—कभी टेरेस पर, कभी उसके घर में जब उसके घरवाले बाहर होते। वो चूसने में एक्सपर्ट हो गई, और मैं उसकी चूत चाटने में। लेकिन फिर वो लोग शहर से शिफ्ट हो गए। मुझे आज भी वो याद है—उसकी कामुक आंखें, उसकी टाइट चूत, और वो पागलपन भरी चुदाई। बहुत शौक था उसे सेक्स का, और चूसना तो वो जबरदस्त लगाती थी। कभी-कभी सोचता हूं, काश वो वापस आ जाए, तो फिर से वही आग लगाऊं।